क्यों आती है साल में दो बार हनुमान जयंती?, जयंती और जन्मोत्सव मे क्या है अंतर। वर्तमान समाचार

हनुमान जयंती यानी जिस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को और ग्रेगोरियन कैलैंडर के मुताबिक मार्च या अप्रैल के बीच। इसके अलावा दूसरी कार्तिक कृष्‍ण चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्दशी को अर्थात सितंबर-अक्टूबर के बीच भी मनाई जाती है। तमिलनाडु और केरल में हनुमान जयंती मार्गशीर्ष माह की अमावस्या को तो वहीं उड़ीसा में वैसाख महीने की पहली तारीख को मनाई जाती है। चैत्र पूर्णिमा को मेष लग्न और चित्रा नक्षत्र में प्रात: सुबह 6 बजे हनुमानजी का जन्म एक गुफा में हुआ था। इसका मतलब यह हुआ कि चैत्र माह में उनका जन्म हुआ था। फिर सवाल यह खड़ा होता है कि चतुर्दशी क्यों मनाते हैं? वाल्मिकी रचित रामायण के अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था। इसीलिए एक तिथी को विजय अभिनंदन महोत्सव के रुप में और दूसरी को जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है।

Hanuman Jayanti Vartman Samachar 1
हनुमान जयंती

आखिर क्या अंतर है जन्मोत्सव और जयंती मे।

जन्मोत्सव और जयंती इन दोनों शब्दों का एक ही मतलब होता है यानी जन्मदिवस। लेकिन फिर भी इनके बीच एक बड़ा अंतर है जिसे हम सभी नज़रअंदाज करते हैं। दरहसल जन्मदिवस या जन्मोत्सव जीवित व्यक्तियों का मनाया जाता है, और जयंती उन लोगों की मनाई जाती है जो मर चुके हैं। हालांकि हिदूं धर्म में देवी-देवताओं को अमर माना गया है। इसीलिए उनके जन्मदिन को जन्मोत्सव कहना ज्यादा उचित है। रही भगवान हनुमान की बात तो सबको पता है कि वे आठ चिरंजीवीयों मे से एक हैं। उन्हें अमर रहने का वरदान प्राप्त है। मान्यता है कि इस वरदान को प्राप्त करने के बाद हनुमान जी ने गंधमाधन पर्वत पर अपना निवास बनाया और इसी स्थान पर वे आज भी मौजूद हैं। बजरंगबली के अमर होने की वजह से ही उनके जन्मदिन को जयंती के बजाय जन्मोतस्व कहना ज्यादा उचित है।     

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