भारत में समय से पहले क्यों जन्म ले रहे बच्चे जानिए क्या है कारण। वर्तमान समाचार

भारत मे हर दो सेकेंड में समय से पहले पैदा हो जाता है। और तो और हर 40 सेकंड में इनमें से एक बच्चे की मौत भी हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र यूएन एजेंसियों द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में सभी प्री-टर्म जन्मों गर्भावस्था के 37 वें सप्ताह से पहले पैदा हुए बच्चे में से लगभग आधे पांच देशों- भारत, पाकिस्तान, नाइजीरिया, चीन और इथियोपिया में हुए। दुनिया भर में समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में से 45 प्रतिशत बच्चे जो समय से पहले जन्म लेते हैं उनमे। उच्च मृत्यु दर का खतरा है। यह बच्चों के अस्तित्व और स्वास्थ्य के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है। एक आंकड़े के मुताबिक वर्ष 2020 में 13.4 मिलियन 2020 में 13.4 मिलियन बच्चे समय से पहले पैदा हुए थे और करीब 10 लाख बच्चे जटिलताओं के चलते मारे गए थे। यह डब्ल्यूएचओ, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य के लिए भागीदारी द्वारा तैयार की गई ‘बॉर्न टू सून’: डिकेड ऑफ एक्शन ऑन प्री-टर्म बर्थ’ रिपोर्ट के अनुसार डब्ल्यूएचओ, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष और मातृ, नवजात और बाल स्वास्थ्य के लिए भागीदारी (पीएमएनसीएच) – महिलाओं, बच्चों और किशोरों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा गठबंधन है। 2020 में बांग्लादेश में अनुमानित प्री-टर्म जन्म दर 16.2 प्रतिशत थी, इसके बाद मलावी 14.5 प्रतिशत और पाकिस्तान 14.4 प्रतिशत पर थे। भारत और दक्षिण अफ्रीका, प्रत्येक अनुमानित 13 प्रतिशत पर हैं। समय पूर्व जन्म दर वाले शीर्ष पांच देशों में भारत शामिल भी है। पांच देशों के लिए समय पूर्व जन्म संख्या वास्तव में खतरनाक है क्योंकि भारत 30.16 लाख जन्मों के साथ सूची में सबसे ऊपर है, पाकिस्तान 9.14 लाख, नाइजीरिया 7.74 लाख और चीन 7.52 लाख पर है। रिपोर्ट में WHO और UNICEF के अद्यतन अनुमान शामिल हैं। भारत में प्री-टर्म जन्म का क्या कारण है और क्या वजह है जो पिछले कई वर्षों मे प्री-टर्म जन्म भारत में इतने बढ़ गए? स्पष्ट रूप से नवजात देखभाल के लिए बुनियादी ढाँचे को और अधिक विस्तृत और अंतिम-मील बनाने की आवश्यकता है। इसी की  व्याख्या करते हुए, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (एनएनएफ) के महासचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा, “ग्रामीण क्षेत्रों में, स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच की कमी की एक आम शिकायत हुआ करती थी, लेकिन विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों जैसी पहलों में सुधार हुआ है। लेबर रूम और कुशल प्रसव ने कई प्री-टर्म शिशुओं को बचाने में मदद की है। लेकिन वे अभी भी उतने विस्तृत नहीं हैं”। सरकार ने इसके लिए कई योजनाएं शुरु की जैसे- “भारत नवजात कार्य योजना और राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम और देश भर में कई विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (एसएनसीयू) की स्थापना की गई”। डॉ वी.सी. मनोज जो NNF के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ वी सी मनोज ने कहा, “जीवन शैली में बदलाव, पुरानी बीमारियां और आईवीएफ गर्भधारण जैसे कई कारक शहरी केंद्रों में प्री-टर्म जन्मों में वृद्धि के साथ जुड़े हुए हैं।

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