WFI Sexual Harassment: पदक दिलाने वाले पहलवानों के साथ ये कैसा इंसाफ? वर्तमान समाचार

नई दिल्ली:  इस वर्ष की शुरुआत में जनवरी में भारतीय कुश्ती महासंघ के खिलाफ कुछ पहलवानों ने मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने कुश्ती संघ के अंदर चल रहीं गड़बड़ीयों और अनियमितताओं से पर्दा उठाया था। आरोप था कि कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने कई महिला पहलवानों का यौन शोषण किया है उनकी मांग थी की कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिहं को बर्खास्त कर उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए। तब खेल मंत्रालय द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद धरने को समाप्त कर दिया गया था। 2 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक इस मामले में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है, और ना ही बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज किया गया। आखिर में भारतीय पहलवानों के पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा तब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

21 अप्रैल को फिर से शुरु हुआ धरना।

बीते 21 अप्रैल को पहलवानों ने इंसाफ की लड़ाई फिर से शुरु की और कनॉट प्लेस थाने में जाकर शिकायत दर्ज कराई, पुलिस ने उनकी शिकायत तो दर्ज कर ली लेकिन FIR नहीं दर्ज की। इसके बाद पहलवानों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जिसमें आज सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई कर फैसला सुना सकता है।

साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत कई पहलवान दे रहे हैं धरना।

बजरंग पुनिया, साक्षी मलिक और विनेश फोगाट समेत कई पहलवान समेत 23 अप्रैल से एक बार फिर जंतर मंतर बार धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि जो मांगे उन्होंने रखीं थीं और जिन शर्तों पर धरना खत्म किया था, वे पूरी नहीं हुई हैं, इसलिए न्याय मिलने तक यह धरना जारी रहेगा। हालांकि एक फायदा जरुर हुआ है कि उनके इस धरने के प्रभाव के चलते खेल मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ मे 7 मई को होने वाले चुनावों पर रोक लगा दी, और तो और एक एड-हॉक पैनल बनाने का आदेश दिया जो 45 दिनों मे कुश्ती संघ के चुनाव कराएगा। वहीं दूसरी तरफ भारतीय पहलवानों का कहना है कि उन्हें कुश्ती संघ के चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है, वे बस इतना चाहते हैं कि बृज भूषण शरण सिंह पर कार्रवाई हो। यह देखने वाला होगा कि जिन खिलाड़ियों ने देश का इतना नाम किया सरकार उनके लिए क्या करती है क्या सरकार उन्हें इंसाफ दिला पाएगी।

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