Manipur Violence: हिंसा की आग मे जल रहा मणिपुर आखिर क्या है विवाद जानिए? वर्तमान समाचार

इंफाल: पिछले दिनों मणिपुर के 8 जिलों मे हो रही लगातार हिंसा के चलते आज मणिपुर के राज्यपाल ने राज्य के मजिस्ट्रेटों को दंगाईयों को अत्यधिक मामलों में देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया है। धारा 144 लगाकर इंटरनेट सेवाओं पर अस्थाई तौर पर रोक लगा दी गई है। सेना और असम राइफलस के साथ वहां पर रैपिड एक्शन फोर्स को भी भेज दिया गया है। केंद्र सरकार लगातार मणिपुर कि स्थति पर नजर बनाए हुए है। गृह मंत्री अमित शाह ने ने फोन पर मुख्यमंत्री बिरेन सिंह से बात कर स्थति की जानकारी ली और हर संभव मदद देने का आश्वासन भी दिया। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर घरों और दुकानों में आग लगने के दृश्यों के रूप में शांति के लिए कई अपीलें भी की गईं। मणिपुर के आठ जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। पूरे राज्य में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 5 दिनों के लिए बंद कर दी गई हैं। सरकार अभी तक जानमाल के नुकसान और  घायल लोगों की संख्या नहीं बता पाई है।

क्या है हिंसा की वजह?

बता दें कि मणिपुर के कुल छेत्रफल का 90 प्रतिशत हिस्सा पहाड़ी है। जहां मुख्यता तीन समुदाय के लोग रहते हैं- जहां मैतई, नागा और कुकी समुदाय के लोग रहते हैं। जिनमें मैतई समुदाय के लोग जो कि हिंदू धर्म से आते हैं, वे 53 प्रतिशत के करीब हैं। नागा और कुकी समुदाय जो ईसाई धर्म से ताल्लुक रखते हैं वे 40 प्रतिशत के करीब हैं। वहीं 7 प्रतिशत या तो बाहर से आए हैं या फिर मणिपुर के ही म्यांग समुदाय के लोग हैं जो की मुस्लिम है। जानकारी के मुताबिक मणिपुर के कानून के मुताबिक सिर्फ अनुसूचित जनजाति के लोग ही पहाड़ी इलाकों मे बस सकते हैं। इसलिए सालों से मैतई समुदाय के लोग अपना दर्जा अनुसूचित जाति से हटाकर अनुसूचित जनजाति  करने की मांग कर रहे हैं, ताकि वे लोग भी पहाड़ी इलाकों में जाकर बस सकें। बीते बुधवार को हाईकोर्ट राज्य सरकार को मैतई समुदाय को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने पर विचार करने को कहा। जिसके विरोध में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर (ATSUM)  ने विरोध मार्च निकाला जहां हजारों लोग इकट्ठा हो गए जिसके बाद से ही पूरे राज्य में हिंसा भड़क उठी है।

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