आस्था और सुंदरता का समावेश उत्तराखंड का कैचीधाम मनमोहक, सरल, और सुंदर। वर्तमान समाचार

भारत का एक ऐसा राज्य जो अपने प्राकृतिक नजारों के लिए जाना जाता है। जी हां , भारत के उत्तर में मौजूद उत्तराखंड अपने मंदिरों और प्राकृतिक वातावरण के पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। इसी उत्तराखंड के नैनीताल में बसा है एक ऐसा धाम जो लाखों नहीं करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। नैनीताल से 17 किलोमीटर की दूरी पर बसा कैंची धाम में श्री नीम करौली महाराज का आश्रम बना हुआ है ,जो कि हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बन गया है। जब आप नैनीताल से कैंची धाम की ओर जाते हैं, तो यहां का सुंदर द्रश्य और ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच से निकलती नदी की कल-कल करती धारा आपका मन मोह लेती है। सड़क द्वारा इस पूरे रास्ते के सफर में आपको अपनी जिंदगी से प्यार होने लग जाएगा, जिसमें ऐसा सुकून आपको कहीं ओर नहीं मिल पाएगा। ठंडी-ठंडी हवा जब आपके चेहरे से टकराएगी, तो ऐसा लगेगा मानों ये हवाएं आपसे बात कर रहीं हों। तो आइए आगे जानते हैं, कैंची धाम से जुड़ी सारी जानकारियां।

Kainchi Dham Vartman Samachar
कैंची धाम फोटो-वर्तमान समाचार

कैंची धाम मंदिर का इतिहास

उत्तराखंड में स्थित कैंची धाम मंदिर की लोकप्रियता इतनी अधिक हो गई कि यहां देश तो ठीक विदेशों से भी लोग दर्शन के लिए आते हैं। यहां पर एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग, भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली, अभिनेत्री अनुष्का शर्मा जैसे कई दिग्गज यहां पर आ चुके हैं और वे कैंची धाम मंदिर में आस्था भी रखते हैं। नीम करौली बाबा के नाम से प्रसिद्ध इस जगह का इतिहास काफी स्पष्ट है। यहां पर लोग नीम करौली बाबा को हनुमान जी का अवतार मानते हैं। नीम करौली बाबा का जन्म सन् 1900 में हुआ था। मात्र 11 वर्ष की आयु में उनका विवाह होने के साथ 17 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था और वे धर्म से जुड़े हुए थे। सन् 1956 में बाबा ने गृहस्थ जीवन का त्याग कर दिया था और साधु-सन्तो के साथ विचरण करने लगे। नीम करौली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। लोग उन्हें लक्ष्मण दास, तिकोनिया वाले बाबा, हांडी वाले बाबा के नाम से जानते थे। उत्तराखंड के कैंची धाम में बाबा नीम करौली 1961 को यहां आएं थे और उन्होंने अपने मित्र पूर्णानंद के साथ मिलकर यहां पर आश्रम बनाने का विचार किया और फिर 1964 में इस आश्रम की स्थापना हुई, जिसे नीम करौली बाबा आश्रम कहा जाता है। लोग नीम करौली बाबा को हनुमान जी का अवतार मानते हैं और उनके बारे में कई सारे चमत्कारिक किस्से भी आपको यहां पर सुनने को मिल जाएंगे। नीम करौली बाबा और हनुमान जी की वजह से यह जगह प्रसिद्ध होने के साथ यहां आने वाला व्यक्ति कभी खाली नहीं जाता है। यहां पर नीम करौली बाबा का समाधी स्थल होने के साथ उनकी एक बड़ी मूर्ति भी है‌ और हनुमान जी की भी मूर्ति बनी हुई है। यहां पर प्रार्थना कक्ष भी बना हुआ हैं।   

कैंची धाम मंदिर खुलने का समय

कैंची धाम मंदिर रोजाना सुबह 7:00 बजे खुलता है और शाम को 6:00 बजे यह बंद हो जाता है‌‌। सर्दियों में यहां अत्यधिक ठंड होने के कारण यहां स्थित आश्रम को बंद कर दिया जाता है , किसी विशेष परिस्थिति में हीं इसे खोला जाता है। वैसे मंदिर तो भक्तों के लिए हमेशा खुला रहता है।

कैंची धाम तक कैसे पहुंचे ?

उत्तराखंड में स्थित कैंची धाम यातायात के मामले में बहुत हीं सुगम है। आपको पूरे भारत से यहां आने के लिए साधन मिल जाएंगे। कैंची धाम पहुंचने के लिए आप तीन तरह के यातायात विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं।

  • वायुमार्ग से – यदि आप हवाई मार्ग से कैंची धाम आते हैं, तो आपको पंतनगर एयरपोर्ट पर उतरना होगा, यह एयरपोर्ट कैंची धाम से 71 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां से आप टैक्सी या बस के द्वारा कैंची धाम तक पहुंच सकते हैं।
  • रेलमार्ग से – यदि आप रेल के द्वारा कैंची धाम आना चाहते हैं तो कैंची धाम के सबसे पास का रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन है, वहां पर आपको उतरना होगा। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से कैंची धाम 37 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसके लिए आप टैक्सी  उत्तराखंड परिवहन की बस या निजी वाहन का उपयोग कर यहां तक पहुंच सकते हैं।
  • सड़क मार्ग से – अगर आप सड़क मार्ग से कैंची धाम आना चाहते हैं तो पहले नैनीताल आएं, वहां से आपको कैंची धाम के लिए निजी वाहन, टैक्सी और बस जैसी सुविधाएं मिल जाएगी। नैनीताल से कैंची धाम की दूरी 17 किलोमीटर है और पूरे रास्ते भर के नजारे आपको मोहित कर देंगे।

कैंची धाम आने के लिए सही समय-

कैंची धाम में बाबा नीम करौली जी महाराज का आश्रम बना हुआ है, जहां पर भक्तगण बारह महीने आते हैं। कैंची धाम मंदिर में प्रतिवर्ष 15 जून को मंदिर का स्थापना दिवस मनाया जाता है, उस समय यहां मेले और भंडारे का आयोजन किया जाता है और लाखों की संख्या में भक्त इस स्थापना समारोह में शामिल होते हैं। कैंची धाम आने के लिए अक्टूबर से जून का समय बहुत हीं अच्छा माना जाता है‌। ठंड के समय यहां पहाड़ियों पर ओढ़ी बर्फ की चादर आपको एक अलग हीं सुकून देती है। बारिश के समय का नजारा भी यहां लुभावना होता है, पर भारी बारिश की संभावना यहां हमेशा बनी रहती है।

कैंची धाम मंदिर के आसपास के पर्यटन स्थल-

नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम अपने सुंदर और प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां पर पास में ही भीमताल हिल स्टेशन है, जो अपने चारों ओर से देवदार के लंबे वृक्षों और जंगलों से घिरा हुआ है। कैंची धाम से 17 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ों के बीच बसा यह एक हिल स्टेशन है, जो अपने प्राकृतिक नजारों के लिए जाना जाता है। यहां पर पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं और आप एडवेंचर गतिविधियों का भी लाभ यहां पर ले सकते हैं। यहीं से थोड़ी दूर पर स्थित सातताल भी घूमने के लिए एक बहुत अच्छी जगह है। यहां पर आपको सात पानी की झील दिखाई देती है, जिसके नाम पर ही इस जगह का नाम सात ताल पड़ा। यहां भी बड़ी संख्या में लोग बोटिंग एडवेंचर के लिए आते हैं। कैंची धाम के आसपास बहुत सारे सेब, खुबानी, चाय आदि के बागान है। यहां पर आप चाय के उत्पादन को भी देख सकते हैं। कैंची धाम वास्तव में आपको किसी जन्नत से कम नहीं लगेगा, बहुत सुन्दर है यह जगह।

कैंची धाम में रूकने के लिए बेस्ट होटल-

  • Amar Valley Resort
  • Baba Benison Resort And Restaurant
  • Hotel Green Park
  • Kainchi Boutique Homestay
  • Green Valley Hotel

तो दोस्तों हमने आपको इस पोस्ट में कैंची धाम के बारे में सारी जानकारी उपलब्ध करा दी है, तो आप भी एक बार कैंची धाम अवश्य जाएं। अगर आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई हो तो हमें कमेंट सेक्शन में कमेंट करके जरूर बताइएगा और अपने दोस्तों तथा रिश्तेदारों को ज्यादा से ज्यादा यह पोस्ट शेयर करें।

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