श्रावस्ती के आकर्षक पर्यटन स्थल– (Shravasti Tourist Places In Hindi) वर्तमान समाचार

भारत के उत्तर में बसा उत्तरप्रदेश एक ऐसा राज्य है, जो ऐतिहासिक महत्व के साथ पर्यटन स्थलों के लिए भी जाना जाता है। यहां के प्रत्येक शहर की अपनी अलग गाथा है और प्रत्येक शहर के अपने अलग आकर्षक पर्यटन स्थल भी हैं। लखनऊ से 155 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक ऐसा धार्मिक केंद्र जो बौद्ध और जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जी हम बात कर रहे हैं श्रावस्ती की। यह वहीं स्थान है जहां पर भगवान बुद्ध ने ज्ञान दिया था और जैन समाज के तीसरे तीर्थकर शोभनाथ का जन्म भी श्रावस्ती में हुआ था। आज इस पोस्ट में हम आपको श्रावस्ती से जुड़ी सारी जानकारी आपके साथ साझा करेंगे, तो पोस्ट को पूरा पढ़िएगा।

Shravasti Vartman Samachar
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श्रावस्ती किसलिए प्रसिद्ध है ? (Why is Shravasti Famous For)

श्रावस्ती बौद्ध धर्म और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र जगह है। विश्व को शांति का संदेश देने वाले भगवान बुद्ध ने यहां पर 14 वर्षों तक तपस्या कर दुनिया को शांति और अहिंसा का पाठ सिखाया था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पुत्र लव ने श्रावस्ती को हीं अपने राज्य कि राजधानी बनाकर यहां पर राज किया था। जैन धर्म के संस्थापक महावीर स्वामी के चार कल्याणक भी यहीं पर हुए। भगवान बुद्ध और महावीर स्वामी के समय के कई सारे अवशेष यहां पर आपको मिल जाएंगे। राप्ती नदी के किनारे बसे श्रावस्ती का जिक्र कई पुराने ग्रंथों में देखने को मिल जाता है, जो कि भगवान बुद्ध के समय छह बड़े शहरों में से प्रमुख था। श्रावस्ती में नेपाल, तिब्बत, भूटान, म्यांमार आदि देशों से अनेक लोग जो बुद्धिज़्म से जुड़े हैं वे भी आते हैं।

श्रावस्ती में घुमने के स्थान ( Tourist Palace Shravasti In Hindi)

वैसे तो श्रावस्ती एक तीर्थस्थल है, लेकिन पर्यटन की दृष्टि से भी यहां पर बहुत सारे पर्यटन स्थल स्थित है। आज हम आपको श्रावस्ती के पर्यटन स्थलों के बारे में हीं बताऐंगे।

  • विश्व शांति घंटा पार्क-

श्रावस्ती में विश्व शांति के परचम को सुनाता एक विशाल घंटा पार्क भी है। बौद्ध धर्म के इस स्थान के महत्व को जानते हुए सरकार ने सन् 1981 में यहां पर पार्क और विशाल घंटे का निर्माण कराया था।

Japan Bell in Shravasti
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जापान के सहयोग से लगाया गया यह घंटा अपनी मधुर ध्वनि के साथ विश्व शांति का संदेश देता है, यहां के स्थानीय लोग इसे घंटाघर भी कहते हैं। तो अगली बार जब भी आप श्रावस्ती जाएं, तो इस घंटे को बजाकर विश्व शान्ति की कामना जरूर करें।

  • जेतवन पुरातत्व क्षेत्र-

जेतवन श्रावस्ती का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जो कि दो सौ एकड़ जंगल में फैला हैं। यहां पर आपको ढेर सारी प्राचीन और पुरातात्विक जगहें देखने के लिए मिल जाती है। जेतवन विहार श्रावस्ती के सेहट के पास स्थित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान बुद्ध ने यहां पर 24 वर्ष बिताए थे।

Jetvana Shravasti
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इस जंगल के अलग-अलग जगह में हुई खुदाई में भगवान बुद्ध के काल के कई नगरों के पुरातत्व अवशेष प्राप्त हुए हैं। जेतवन में प्रवेश करने के लिए आपको टिकट लेना पड़ेगा और यहां का रखरखाव भी बहुत अच्छा है।

  • बुद्धिस्ट मंदिर श्रावस्ती-

बुद्धिस्ट मंदिर श्रावस्ती का एक प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिर है,जिसका निर्माण सन् 2000 में हुआ था। यह श्रावस्ती का एक आधुनिक मंदिर होने के साथ यहां पर प्रवेश करने पर आपको विदेशों के बुद्ध मंदिर जैसी आध्यात्मिक शक्तियों का अनुभव होता है। इस मंदिर में प्रवेश करने पर आपको भगवान बुद्ध की एक बहुत बड़ी प्रतिमा दिख जाती है, जो कि गोल्डन कलर की होने के साथ बहुत सुंदर लगती है। श्रावस्ती के इस आधुनिक मंदिर को महामंगोल और थाई मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। करीबन 100 एकड़ जमीन में फैला यह मंदिर चारों ओर से हरियाली से घिरा हुआ है।

Buddha Temple
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स्वच्छ नालियों और तालाबों में आपको रंग बिरंगी मछलियां भी तैरती दिख जाती है। यह जगह श्रवास्ती में मुख्य हाईवे के पास हीं स्थित है। यह मंदिर आपको शांत माहौल प्रदान करने के साथ मेडीटेशन के लिए भी यह उपयुक्त जगह है। इस जगह का संचालन विदेशी ट्रस्ट के हाथों में होने से यहां पर पूरी जांच के बाद हीं आपको प्रवेश मिलता है। शांति ढुंढने आएं लोगों के लिए यह बहुत अच्छी जगह है।

  • पीपल का ऐतिहासिक पेड़-

जेतवन के पास स्थित पीपल के पेड़ का बौद्ध ग्रंथों में बहुत महत्व बताया गया है। यह पेड़ भगवान‌ बुद्ध के समय का है, जो लोहे के खंभों के सहारे टिका है।

Peepal Tree
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यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि भगवान बुद्ध ने इसी पेड़ के नीचे बैठकर लोगों को उपदेश दिया था। पीपल के इस पेड़ के आसपास खुदाई में कई सारे अवशेष मिले हैं , जो बौद्ध धर्म के महत्व को बताते हैं। जब भी विदेशों से बौद्ध धर्म के लोग भारत आते हैं  तो वे इस वृक्ष के दर्शन जरूर करते हैं।

  • विपश्यना साधना केंद्र-

श्रावस्ती में स्थित यह जगह आप को शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराती है। यहां की हरियाली और प्रकृति के बीच बैठकर आप मेडिटेशन कर सकते हैं। ध्यान लगाने के लिए यह एक योग्य जगह है।

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यहां के चारों ओर आपको हरा-भरा प्राकृतिक माहौल ही दिखाई देगा। यहां पर आप से किसी प्रकार का कोई चार्ज नहीं लिया जाता है, लेकिन आप अगर कुछ डोनेशन करना चाहते हैं तो कर सकते हैं।

  • बाबा विभूतिनाथ मंदिर-

श्रावस्ती सिर्फ बौद्ध धर्म का धार्मिक स्थल ना होकर यह हिंदू धर्म की आस्था का भी केंद्र है। यहां पर स्थित बाबा विभूतिनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। इस मंदिर के गर्भ में आपको पंचमुखी शिवलिंग के दर्शन होते हैं। मंदिर के बाहर नंदी जी की प्रतिमा भी मनोहारी है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने कराया था।

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इस मंदिर के पास पंचमुखी हनुमान जी का मंदिर भी स्थित है। यह मंदिर घने जंगलों के बीच स्थित होने के साथ यहां का प्राकृतिक वातावरण बहुत हीं अच्छा लगता है। सावन मास में यहां पर भक्तों की बहुत भीड़ होती है।

  • सीताद्वार मंदिर-

श्रावस्ती में स्थित यह मंदिर भी धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां पर भगवान श्रीराम के पुत्र लव और कुश का जन्म हुआ था। यहां पर एक कुंड भी स्थित है।

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जिसके बारे में ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब माँ सीता को प्यास लगी थी, तब लक्ष्मण जी ने इस जगह पर बाण चलाकर यहां से जल की धारा निकाली थी और मां सीता ने इस जल को पीकर अपनी प्यास बुझाई थी। इस कुंड के पानी से सभी प्रकार के रोग दूर होते हैं। यह मन्दिर चारों ओर से हरियाली से घिरा हुआ है।

  • पक्की कुटी और कच्ची कुटी-

पक्की कुटी को श्रावस्ती के सबसे ऊंचे टीले के रूप में जाना जाता है, इसे अंगुलीमाल स्तुप भी कहते हैं। इसका निर्माण प्रसेनजीत ने भगवान बुद्ध के सम्मान में करवाया था। यह अंगुलीमाल गुफा के रूप में भी काफी प्रसिद्ध है।

Pakki kuti Shravasti
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कच्ची कुटी का इतिहास काफी पुराना होने के साथ इसे अनाथपीडिंका स्तुप के नाम से भी जाना जाता है। कच्ची कुटी नाम के पीछे वजह यह है कि इसे बनाने में अस्थाई ईंटों का उपयोग किया गया था।

  • शोभनाथ जैन मंदिर-

श्रावस्ती बुद्ध धर्म का धार्मिक स्थल होने के साथ यह जैन धर्म का भी एक प्रमुख तीर्थ रहा है। यहां पर जैन धर्म के संस्थापक महावीर स्वामी के चार कल्याणक हुए।

Shobhnath Temple
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जैन धर्म के तीसरे तीर्थकर संभव नाथ जी का जन्म भी यही पर हुआ था। शोभनाथ जैन मंदिर के दर्शन करने के लिए बाहर से भी काफी जैन समुदाय के लोग आते हैं।

  • सुहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य-

अगर आप श्रावस्ती के प्राकृतिक नजारों का आनंद लेना चाहते हैं, तो सुहेलदेव वन्यजीव अभयारण्य आपके लिए एक बेहतरीन जगह है। नेपाल बार्डर पर स्थित इस वाइल्डलाइफ सेंचुरी की स्थापना 1988 में की गई थी, जहां आपको चारों ओर घने जंगल हीं नजर आते हैं। यहां पर आपको शीशम, खैर और जामुन के पेड़ बहुतायत में मिल जाते हैं।

Suheldev Jungle safari
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वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घुमाने के लिए आपको जीप और हाथी की व्यवस्था मिल जाती है। इस अभ्यारण्य में बाघ, भालू, चीतल, लोमड़ी, खरगोश, लंगूर, अजगर, मैना, ब्लैक पैरिट, उल्लू जैसे वन्यजीव और पक्षी देखने को मिल जाते हैं। बहुत से लोग यहां पर घुमने के लिए आते हैं।

लखनऊ से श्रावस्ती कैसे पहुंचे ? (How to reach Shravasti from Lucknow)

लखनऊ से श्रावस्ती की दूरी 155 किलोमीटर है। अगर आप विदेश से श्रावस्ती आना चाहते हैं, तो पहले आपको लखनऊ उतरना होगा। श्रावस्ती तक पहुंचने के लिए सिर्फ सड़क मार्ग का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। लखनऊ में इंटरनेशनल एयरपोर्ट होने से तिब्बत, जापान, थाईलैंड और नेपाल से आने वाले लोग पहले लखनऊ ही पहुंचते हैं। वहां से आप टैक्सी, उत्तरप्रदेश परिवहन की बस या निजी वाहन से श्रावस्ती तक पहुंच सकते हैं। अगर आप रेलवे से आ रहे हैं तो आपको बलरामपुर रेलवे स्टेशन या गोंडा रेलवे स्टेशन पर उतरना होगा, वहां से आप बस या टैक्सी से श्रावस्ती आ सकते हैं।

श्रावस्ती में ठहरने के लिए अच्छी होटल ( Best Hotels in Shravasti)

  • Hotel Platinum Shravasti
  • Shravasti Residency
  • Lotus Nikko HOTEL
  • UPT Rahi Tourist Banglow
  • Hotel Shravasti International
  • The Lotus Sutra Hotel

बलरामपुर के पर्यटन स्थल ( Balrampur Tourist Palaces)

राप्ती नदी के किनारे स्थित बलरामपुर नेपाल बार्डर के पास स्थित होने के साथ अपनी चीनी मिलों के लिए जाना जाता है। श्रावस्ती से 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बलरामपुर में घूमने के लिए काफी सारे स्थान हैं, जिनमें प्रमुख हैं।

  • बिजलपुर मंदिर
  • देवीपाटन मंदिर तुलसीपुर
  • कोईलाबास
  • झालिधाम
  • जयप्रभा ग्राम

बहराइच में घुमने की जगह ( Palaces To Visit In Bahraich)

बहराइच उत्तरप्रदेश का एक मुख्य जिला है, जो श्रावस्ती से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां की मुख्य नदी घाघरा होने के साथ बहराइच में घुमने के लिए बहुत सारे स्थान आपको मिल जाएंगे।

  • काकहरा इको पर्यटन
  • राजकीय इंदिरा गांधी उद्यान
  • सिद्धनाथ महादेव मंदिर
  • राजा की कोठी
  • कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य
  • संघारण महाकाली मंदिर

तो दोस्तों हमने आपको इस पोस्ट में श्रावस्ती से जुड़ी सारी जानकारी प्रदान कर दी है। अगर आपके पास भी इस बारे में कोई ओर अन्य जानकारी हो तो हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताइएगा और आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ जरूर शेयर करें।

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