भारत और म्यांमार से हथियारों के पार्टस वापिस खरीदेगा रूस। वर्तमान समाचार

इन दिनों रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते हथियारों की कमी से जूझ रहा है। जिसका एक उदाहरण हमने तब देखा जब वैगनार ग्रुप के लीडर और फाउंडर येवगेनी प्रिगोजिन ने रूसी सेना और सरकार पर गोलाबारूद की कमी पर गुस्सा जाहिर कर कई गंभीर आरोप लगाए और युद्ध से हटने की धमकी तक दे डाली। उनका कहना था कि “उनके लड़ाके यहां युद्ध में मारे जा रहे हैं कोई किसी का बेटा है तो कोई किसी का बाप। हम यहां सिर्फ 30 प्रतिशत गोलाबारूद के साथ लड़ रहे हैं। हमारे पास हथियारों की भारी कमी है। लेकिन रूसी सरकार और सेना के जनरल मॉस्को में मोटी बिल्लीयों की तरह बैठे हुए हैं। मै आखिरी बार कहता हूं यह लड़ाई हमारी नहीं है अगर हमे लड़ने के लिए हथियार नहीं दिए गए तो हम बाखमुत से हट जाएंगे”।

भारत से 1,50,000 तो म्यांमार से 24 मिलियन डॉलर के पार्टस लिए जाएंगे वापिस।

वित्तीय समाचार आउटलेट निक्केई एशिया ने सोमवार को बताया कि रूस पहले से भारत और म्यांमार को बेचे गए टैंकों और मिसाइलों के पुर्जों को फिर से आयात कर रहा है, ताकि यूक्रेन में उपयोग के लिए पुराने हथियारों और उपकरणों में सुधार किया जा सके। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक रूसी रक्षा उद्योग निर्माता उन उपकरणों को वापस खरीद रहे हैं जो उन्होंने पहले एशिया में विदेशी खरीदारों को उत्पादित और निर्यात किए थे।

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Uralvagonzavod जो रूसी सेना के लिए टैंक बनाती है, इस कंपनी ने दिसंबर 2022 में म्यांमार की सेना से 24 मिलियन डॉलर के उत्पादों का आयात किया था। जिसमें 6000 साइटिंग टेलिस्कोप और 200 कैमरा शामिल थे। कयास ये लगाए जा रहे हैं कि रुस इन्हें अपने T-72 टैंकस में इस्तेमाल करेगा। इसी तरह एक रूसी मिसाइल निर्माता ने अगस्त और नवंबर में भारतीय रक्षा मंत्रालय से एंटी-एयर मिसाइलों पर नाइट-विज़न साइट लगाने के लिए 150,000 डॉलर के पुर्जे खरीदे थे। जिन्हें अब वह वापिस खरीद रहा है।  

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