Parshuram Jayanti 2023: परशुराम जयंती क्या है और हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व है? वर्तमान समाचार

परशुराम जयंती की हिंदू धर्म में बहुत मान्यता है। लोग परशुराम जयंती या भगवान परशुराम के जन्म की वर्षगांठ को जबरदस्त उत्साह और भक्ति के साथ मनाते हैं। यह त्योहार वैशाख के महीने में शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन मनाया जाता है, जो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार अप्रैल और मई में होता है। परशुराम जयंती इस वर्ष 22 अप्रैल को मनाई जाएगी। भगवान  परशुराम भगवान विष्णु के छटे अवतार थे। जिन्होंने भ्रष्ट, विनाशकारी और अधार्मिक राजाओं को हटाकर और उन दुष्टों का का सर्वनाश किया जिन्होंने पृथ्वी व इसकी संपत्ति को लूटा और राजाओं के रूप में अपने कर्तव्यों की अवहेलना की।

परशुराम जयंती का इतिहास।

हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान विष्णु के दस अवतारों में से छटे अवतार भगवान परशुराम का बहुत सम्मान है। वे ऋषि जमदग्नि और उनकी पत्नी रेणुका के पुत्र थे। वे ब्राहम्ण कुल में जन्मे थे और उनके चार बड़े भाई थे जिनका नाम रुमानवंत, सुषेण, विश्व और विश्ववसु। भगवान परशुराम का असली नाम राम ही था पर चुकि वे परशु एक रहस्यमय हथियार लेकर चलते थे जो उन्हें भगवान शिव द्वारा दिया गया था, उसी के कारण परशुराम के नाम से जाना जाने लगा। ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म त्रेता युग में हुआ था। भगवान परशुराम महादेव के भक्त थे। उन्हें अपार ज्ञान था। वह एक महान योद्धा थे। वह एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने धार्मिक आदर्शों को बरकरार रखा और अच्छाई को बचाने के लिए बुराई की शक्तियों से संघर्ष किया। भगवान परशुराम उनकी जयंती के अवसर पर उनके अनुयायियों द्वारा इसीलिए पूजनीय हैं।

परशुराम जयंती का क्या महत्व है।

यह पर्व भगवान परशुराम के उत्सव में आयोजित किया जाता है, जिन्हें शक्ति, साहस और धार्मिकता के प्रतिनिधित्व के रूप में माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने बुरे लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और धार्मिक शिक्षाओं के अनुसार अपना जीवन व्यतीत किया था। उनके भक्त परशुराम जयंती पर भगवान परशुराम की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद मांगते हैं। इस दिन बहुत से लोग व्रत भी रखते हैं, पूजा पूरी होने पर ही अपना व्रत खोलते हैं।

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