Movie review: किसी के भाई में नहीं है जान। वर्तमान समाचार

KKBKKJ MOVIE REVIEW: सलमान खान का अपना प्रशंसक वर्ग है, जिसे उनकी फिल्मों का बेताब्री से इंतजार रहता है। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किसी का भाई किसी की जान’ में बहुत सारे पात्र हैं, एक्शन, ड्रामा और रोमांस है, दक्षिण भारत का कनेक्शन भी है, मगर लाउड बैकग्राउंड स्कोर और कमजोर राइटिंग सलमान की स्टार पावर का साथ नहीं देते। सलमान का स्वैग और संवाद उनकी फिल्मों की जान होते हैं, पर यहां स्वैग बनावटी है और डायलॉग्स अटपटे। मूवी में स्पार्क नहीं है। यह बेजान मेलोड्रामा है, जो महज कुछ टुकड़ों में थोड़ा-सा मनोरंजन करती है।

कहानी (Story): भाईजान दिल्ली में अपने तीन भाइयों इश्क, मोह और लव के साथ रहता है। भाइयों की अच्छी देखभाल के खातिर उसने शादी नहीं की है। इश्क सुकून से, मोह मुस्कान से और लव चाहत से प्यार करता है, पर इन तीनों की प्रेम कहानी से भाईजान अनजान है। इस बीच भाग्य की एंट्री होती है। भाग्य के नाम का कनेक्शन भाईजान के पुराने ‘प्यार’ से है। भाग्य को वायलेंस पसंद नहीं है, पर भाईजान गलत करने वालों को सबक सिखाने के लिए हाथ उठाने से परहेज नहीं करता। भाग्य से मिलने के बाद भाईजान के दिल में प्रेम अंकुरित होने लगता है…।

डायरेक्शन(direction): स्क्रीनप्ले एंगेजिंग नहीं है। डायरेक्टर फरहाद न तो इमोशंस को उभार पाए और न ही रोमांटिक ट्रैक को प्रभावी बना पाए। यह उत्तर-दक्षिण के मिलन की बेस्वाद खिचड़ी बनकर रह गई। तमिल फिल्म ‘वीरम’ के इस नीरस हिंदी रीमेक में गीत-संगीत ठीक-ठाक है।

एक्टिंग(acting): सलमान ने अपने टिपिकल अंदाज में काम किया है। पूजा स्टनिंग दिखती हैं। वेंकटेश यहां वेस्ट हो गए। राघव, जस्सी व सिद्धार्थ सभ्य हैं, लेकिन पलक, शहनाज व विनाली सिर्फ ‘फ्रेम’ के लिए हैं। विलेन के रूप में जगपति बाबू और विजेन्दर सिंह की परफॉर्मेंस कामचलाऊ है। भूमिका चावला फिल्म में बस कहने भर को हैं। भाग्यश्री का कैमियो सुकून देता है।

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