महाराणा प्रताप जयंती 2023: चेतक पर चढ़ जिसने भाले से दुश्मन संघारे थे….वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप के इतिहास की एक झलक। वर्तमान समाचार

महाराणा प्रताप जयंती हर वर्ष 9 मई को मनाई जाती है। आज ही के दिन इस वीर योद्धा का जन्म हुआ था। महाराणा प्रताप माहाराणा उदय सिंह के बेटे थे जो मेवाड़ के शासक थे। बता दें कि माहाराणा प्रताप जयंती भारत के राजस्थान राज्य में एक बड़े त्योहार के रुप मे लोगों मे प्रचलित है। जो महाराणा प्रताप को समर्पित होता है। महाराणा प्रताप एक महान योद्धा थे जिन्होंने मुगल साम्राज्य के खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय तक मुगल सम्राट अकबर के साथ युद्ध किया था। महाराणा प्रताप का विवाह जैसलमेर के महाराजा जसवंत सिंह की बेटी से हुआ था। उन्हें उनकी पत्नी का बहुत बड़ा समर्थन मिला था और उनकी मदद से वे लोगों को जोड़ते रहे जो मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़ना चाहते थे। महाराणा प्रताप ने मुगल सम्राट अकबर के साथ कई लड़ाई लड़ी थीं, जो उनकी योग्यता और जोश का परिचायक थीं। महाराणा प्रताप का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध 1576 का हल्दीघाटी का था।

महाराणा प्रताप का इतिहास।

महाराणा प्रताप एक हिंदू राजपूत राजा थे जो राजपूतों के सिसोदिया वंश से थे। उनकी बहादुरी और साहस के लिए राजस्थान में कई शाही परिवारों मे उनके सम्मान में उनकी पूजा भी की जाती है। महान राजा एक सच्चे देशभक्त के रूप में पूजनीय हैं जिन्होंने देश की आजादी के पहले युद्ध की शुरुआत की थी। हल्दीघाटी की लड़ाई में, वह सबसे प्रसिद्ध मुगल सम्राटों में से एक अकबर के साथ लड़े थे। बहुत ही विपरीत स्थितियों मे महाराणा प्रताप को भागना पड़ा था। हालाँकि, वह युद्ध के मैदान में बड़ी संख्या में विरोधियों को मारने में कामयाब रहे थे। जिसके चलते उन्होंने अपनी बहादुरी के लिए सम्मान और प्रशंसा प्राप्त की थी। इसलिए, हर साल ज्येष्ठ शुक्ल चरण के तीसरे दिन, हिंदू कैलेंडर के तीसरे महीने में, उनकी जयंती को महाराणा प्रताप जयंती के रूप में मनाया जाता है। महाराणा प्रताप ने अपने देश, अपने लोगों और, सबसे महत्वपूर्ण, अपने सम्मान के लिए लड़ते हुए अपनी जान दे दी।

किस तरह मनाई जाती है महाराणा प्रताप की जयंती।

उनकी याद में इस दिन पूरे देश में विशेष पूजा, कई सांस्कृतिक कार्यक्रम और वाद-विवाद होते हैं। इस दिन लोग उदयपुर में उनकी स्मारक प्रतिमा के दर्शन भी करते हैं। राजा की विरासत को याद करने के लिए जीवंत परेड और धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित कराया जाता है, जगह-जगह लोगों द्वारा रैलीयों और जनसभाओं का भी आयोजन होता है।  

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