नफरत भरे भाषण देने के मामले में आजम हुए बरी लेकिन अभी नहीं खत्म हुई है मुश्किलें, जानिए क्या है पूरा मामला। वर्तमान समाचार

समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक आजम खां के नफरती भाषण मामले में भले ही बरी हो गए हों लेकिन उनकी मुसिबतें अभी भी खत्म नहीं हुई हैं। बता दें कि उनकी खत्म की गई सदस्यता का मामला बड़े सवाल के रूप में सामने आ गया है। आपको जान लेना चाहिए की यह सवाल संवैधानिक व न्यायिक दोनों ही नजरिए से महत्वपूर्ण है। तो आखिर बात क्या है जिससे आजम खां की सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है। दरहसल, जब आजम खान की सदस्यता रद्द की गई थी तब उनकी खाली पड़ी सीट पर नया विधायक निर्वाचित होकर शपथ ले चुका था, अब समस्या यही है कि उनकी सदस्यता बहाल की जाए भी तो कैसे। आगे अन्य मामलों में ऐसी स्थिति आए, तब क्या होगा? कुछ विधि विशेषज्ञों व कानून के जानकारों का कहना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को नए सिरे से स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने चाहिए। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रहे आजम खां को नफरती भाषण देने के मामले रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने बरी कर दिया है। इसी मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने 27 अक्तूबर 2022 को आजम खां को तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। इसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द हो गई थी। सदस्यता रद्द होने के बाद रामपुर सीट पर उप चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के आकाश सक्सेना विधायक निर्वाचित होकर शपथ भी ले चुके हैं। यही सबसे बड़ा और रोचक सवाल है कि जिस मामले में दोषी होने पर सदस्यता रद्द हो सकती है। तो उसी मामले में बरी किए जाने पर सदस्यता बहाल कैसे हो। इसके बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द हो गई थी। सदस्यता रद्द होने के बाद रामपुर सीट पर उप चुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के आकाश सक्सेना विधायक निर्वाचित हो गए। आकाश शपथ भी ले चुके हैं।

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