अलविदा जुम्मा 2023: क्या है अलविदा जुम्मा? इस्लाम धर्म मे क्या है इसकी मान्यता?

इस्लाम धर्म में जुमा के दिन की खास अहमियत है। मुसलमानों के सभी संप्रदाय इसे बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाते हैं। इसे छोटी ईद या जुमा-तुल-विदा भी कहा जाता है, और यदि यह रमजान के पाक महीने में हो तो इसकी अहमियत और भी बढ़ जाती है। हदीस सरीफ के मुताबिक रमजान में हर नेकी व इबादत के बदले सत्तर गुना ज्यादा सवाब मिलता है। अलविदा जुमा सभी मुसलमानों के लिए बहुत खास है। रामजान के महीने में मुसलमान पूरे 30 दिनों तक रोज़ा रखते हैं। इन चार हफ्तों मे रमजान के महीनों को आखिरी जुमा आता है जिसे अलविदा के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष 21 अप्रैल 2023 को आखिरी जुमा मनाया जाना है। इस दिन की खास बात यह है कि अलविदा के दिन मुसलमान भाई-बहन नए कपड़े पहनते हैं। निफ्ल नमाज़ अदा करते हैं। ऐसा करने का उद्देश सिर्फ ज्यादा से ज्यादा सवाब यानी पुण्य कमाने का होता है। अल्लाह की इबादत करते हैं, उनसे दुआ मांगते हैं। गरीब लोगों की मदद कर परोपकार करते हैं।

Al-vida Jumma Mubarak Vartman Samachar

जुमे को लेकर क्या हैं मान्यताएं।

हदीस के हिसाब से देखा जाए तो इस्लाम से इस दिन की कई बड़ी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। जैसे कि अल्लाह तआला ने इसी दिन आदम आलहिस्सलाम(इस्लाम के हिसाब से धरती पर भेजा गया पहला इंसान) को धरती पर भेजा था। इसी दिन उन्हें जमीन पर उतारा और इसी दिन उनकी वफात यानि मृत्यु भी हुई थी। खास बात यह है कि जुम्मा रमजान महीने के रुखसती का भी प्रतीक है। जिसके खत्म होने के बाद ईद का पर्व आता है। इस्लाम में एक मान्यता यह भी है कि रमजान के आखिरी दस दिनों मे अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए। हर साल आखिरी जुमा धूमधाम से मनाया जाता है, जिसके लिए मस्जिदों मे खास तैयारी की जाती है।

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