पिता के नक्शे कदम पर अखिलेश जहां मिली करारी हार, वहीं से दे रहे चुनावी अभियान को धार। वर्तमान समाचार

लखीमपुर खीरी जिले में दो-दो बार आठों विधानसभा और दोनों लोकसभा खीरी और धौरहरा सीटों समेत प्रदेश में करारी हार मिलने के बाद भी सपा मुखिया ने खीरी से ही लोक जागरण यात्रा की शुरुआत की है। अभी तक पिछड़ों और मुस्लिम वोटों के सहारे सत्ता का स्वाद चखती रही सपा ने इस बार पूरी रणनीति ही बदल दी है। हमेशा एमवाई (मुस्लिम और यादव) की राजनीति करने वाली सपा ने दलितों को भी साधने की कवायद शुरू की है। हमेशा पिछड़ों की राजनीति के सहारे दिल्ली तक की सल्तनत को अपनी मर्जी से चलाने वाले समाजवादी नेता स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव अब उनके ही नक्शेकदम पर चलते हुए आगे बढ़ रहे हैं।अभी तक बसपा से गठजोड़ कर चुनावी वैतरणी पार लगाने की कोशिश में रहे अखिलेश ने दलितों को भी साध रहे हैं। वर्ष 2024 की तैयारियों को लेकर खीरी से शुरू हुई लोक जागरण यात्रा के जरिये अखिलेश ने एलान किया कि वह पिछड़ों और दलितों को साथ-साथ लेकर चलेंगे। लंबे समय से सत्ता से दूर बसपा धीरे धीरे भाजपा की ओर शिफ्ट हो रही है।भाजपा की जीत और सपा की हार का यह सबसे बड़ा कारण रहा है। इसलिए अब तक बसपा के साथ गठजोड़ कर चुनाव में उतरे अखिलेश यादव ने इस बार बिना गठजोड़ के ही एलान किया कि वह कांशीराम के विचारों में आस्था रखते हैं। और कोशिश करेंगे कि उनकी विचारधारा के लोग समाजवादी विचारधारा के साथ मिलकर तानाशाह ताकतों से लड़ें।

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