Sudan: नहीं रुक रहा संघर्ष, अर्धसैनिक बल और सेना दोनों मे से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं। वर्तमान समाचार

सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच हो रहे इस लंबे संघर्ष के चलते दोनों ही पक्षों को जान माल का काफी नुकसान हो चुका है। जानकारी के मुताबिक सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) नामक अर्धसैनिक बल के बीच हिंसा तीसरे दिन भी रात भर जारी रही। डॉक्टरों के एक यूनियन ने जानकारी दी कि अबतक लगभग 100 लोग मारे जा चुके हैं, और एक अनुमान के अनुसार घायलों की संख्या 1,100 है। दोनों पक्षों का कहना है कि दोनों उन्होंने राजधानी खार्तूम में प्रमुख स्थलों को नियंत्रित कर रखा है, जहां आम लोगों ने विस्फोटों से बचने के लिए शरण ली थी। बीते रविवार को दोनों पक्षों ने सीज़फायर के लिए सहमति बनाई थी ताकि घायलों को इलाज के लिए निकाला जा सके। बता दें सूडान में यह संघर्ष सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच के मतभेदों के चलते शुरु हुआ था। 2019 में तख्तापलट के बाद से ही सूडान में सेना का पूर्ण नियंत्रण है।

क्या है संघर्ष का कारण?

2019 में हुए तख्तापलट के बाद से सेना और अर्धसैनिक बल के जनरल एक ही परिषद में बैठकर मिलाजुला कर देश को चला रहे हैं। इस परिषद का प्रमुख सूडान की सेना के प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल बुरहान हैं। तो वहीं अर्धसैनिक बल (RSF) के प्रमुख जनरल हमदान डगलो हैं जो संप्रभु परिषद के उपाध्यक्ष हैं। मतभेद की मुख्य वजह यह है कि संप्रभु परिषद अर्धसैनिक बल (RSF) को सेना में शामिल करना चाहता है तो वहीं दूसरी ओर इस परिषद के उपाध्यक्ष और (RSF) के जनरल हमदान डगलो सेना की इस मांग को 10 साल के लिए टाल देना चाहते हैं। जबकि सेना कैसे भी करके इसे 2 साल के अंदर-अंदर कर देना चाहती है। इसी मुद्दे पर पिछले हफ्ते तनाव बढ़ने के बाद (RSF) ने मेरोवे में सैन्य अड्डे के पास अपने जवानों को तैनात कर दिया था। फिलहाल के लिए सभी देशों ने अपने नागरिकों दूतावास के संपर्क में बने रहने को कहा है। भारत ने भी जरुरी ऐडवाइज़री जारी कर नागरिकों को सतर्कता बरतने और जरुरत पड़ने पर देश छोड़ देने के निर्देष दिए हैं।

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