Buddha Purnima 2023: सुख, शांती, ज्ञान का दिन, बुद्ध पूर्णीमा मे क्या है खास आइये जाने। वर्तमान समाचार

बुद्ध जयंती जिसे उनके ज्ञानोदय के दिन के रूप में भी जाना जाता है उसे बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध पौर्णमी भी कहते हैं। यह त्योहार एक बौद्ध त्योहार है जो पूर्वी एशिया और दक्षिण एशिया के अधिकांश हिस्सों में राजकुमार सिद्धार्थ गौतम, बाद में गौतम बुद्ध बने  जो बौद्ध धर्म के संस्थापक भी थे। जन्म की याद में मनाया जाता है। बौद्ध परंपरा के अनुसार, गौतम बुद्ध का जन्म  563-483 ईसा पूर्व लुंबिनी, नेपाल में हुआ था। नेपाल में काम कर रहे डरहम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविदों ने छठी शताब्दी ईसा पूर्व बुद्ध के जन्मस्थान और तारीख का खुलासा किया था। रेडियोकार्बन और वैकल्पिक रूप से उत्तेजित ल्यूमिनेसेंस तकनीकों से पता लगाया था। बुद्ध के जन्मदिन की सही तारीख एशियाई लूनिसोलर कैलेंडर पर आधारित है और मुख्य रूप से बौद्ध कैलेंडर के बैसाख महीने और बिक्रम संबत हिंदू कैलेंडर में मनाया जाता है। इसी से वेसाक शब्द भी आया है।

भारत मे कैसे मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा।

भारत के अंदर बुद्ध पूर्णिमा के दिन सरकारी अवकाश होता है। जिसे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा शुरू किया गया था, जब वे भारत के कानून मंत्री थे। भारत के सिक्किम, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, बोधगया, लाहौल और स्पीति जिला, किन्नौर, उत्तरी बंगाल के विभिन्न हिस्सों जैसे कलिम्पोंग, दार्जिलिंग मे बुद्ध पूर्णिमा सबसे ज्यादा हर्ष और उल्लास से मनाई जाती है। बता दें महात्मा बुद्ध का असली नाम सिद्धार्थ गौतम था। उनके पिता का नाम राजा शुद्धोदन था, जो कोशल की बढ़ती हुई अवस्था में शाक्य वंश के नेता थे, और उनकी माँ रानी माया थीं। उनका विवाह कम उम्र मे ही राजकुमारी यशोधरा से हो गया था। जब यशोधरा का विवाह हुआ तब उनकी उम्र 16 वर्ष थी। जिस दिन उनकी पत्नी यशोधरा ने बच्चे को जन्म दिया था सिद्धार्थ उसी दिन राजमहल छोड़ ज्ञान की प्राप्ती के लिए निकल गए थे। दोबारा वे कभी भी गृहस्थ जीवन में नही लौटे। उनकी पत्नी ने बेटे राहुल का पालन पोषण अपने दम पर किया और एक संत का जीवन जीया। हैरान करने वाली बात तो यह है कि गौतम बुद्ध इक्ष्वाकु राजवंश के सबसे बड़े सम्राज्य के राजकुमार थे उनके पास सब कुछ था। फिर भी उन्होंने अपने गृहस्थ जीवन का त्याग किया। पति के गृहस्थ जीवन को त्यागने के उनकी पत्नी यशोधरा काफी आहत हुईं थी। उन्होंने अपने सारे सुखों का उसी तरह त्याग किया जैसे उनके पति महात्मा गौतम बुद्ध ने किया था। उन्होंने अपने वस्त्र, जेवर, महल सबकुछ छोड़कर एक कुटिया मे रहना शुरु किया और सादा जीवन जीने लगीं।

भारत के अलावा कहां-कहां प्रचलित है बुद्ध पूर्णिमा।

कई पूर्व एशियाई देशों जैसे वियतनाम और फिलीपींस में, बुद्ध का जन्म चीनी चंद्र कैलेंडर में चौथे महीने के 8 वें दिन मनाया जाता है। जापान में 1873 से ग्रेगोरियन कैलेंडर के 8 अप्रैल को और दिन हांगकांग, मकाऊ और दक्षिण कोरिया में एक इस दिन एक आधिकारिक अवकाश घोषित होता है। वहीं कंबोडिया में बुद्ध के जन्मदिन को विसाक बोचिया के रूप में मनाया जाता है और इस दिन एक सार्वजनिक अवकाश भी होता है जहां देश भर के भिक्षु वेसाक को स्वीकार करने के लिए बौद्ध ध्वज, कमल के फूल, धूप और मोमबत्तियाँ ले जाते हैं। वहीं और इस दिन भिक्षुओं को दान पुण्य भी करते हैं।   

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