Bitcoin: बिटकॉइन भविष्य की डिजिटल करेंसी, आइये जानें। वर्तमान समाचार

बिटकॉइन या (BTC)  एक क्रिप्टो करेंसी है, जिसे हम वर्चुअल या आभासी करेंसी भी कह सकते हैं। इसे किसी एक व्यक्ति, समूह, या संस्था के नियंत्रण से बाहर पैसे और भुगतान के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह वित्तीय लेनदेन में तीसरे पक्ष की भागीदारी की आवश्यकता को दूर करता है। इसे कई एक्सचेंजों पर खरीदा जा सकता है। बिटकॉइन को सबसे पहले 2009 में एक गुमनाम डेवलपर या यूं कह ले कि डेवलपर्स के एक गुमनाम समूह जो ‘सतोशी नाकामोतो’ नाम का उपयोग कर रहा था उसने इसे सबसे पहले पेश किया था। यह तब से दुनिया में सबसे प्रसिद्ध क्रिप्टोकरेंसी बन गई है। इसकी लोकप्रियता ने कई अन्य क्रिप्टोकरेंसी के विकास को प्रेरित किया है, जैसे कि ईथर (ETH) ,लाइटकॉइन, रिपल।

बिटकॉयन को लेकर कुछ प्रमुख बातें।

  • बाजार के पूंजीकरण के हिसाब से बिटकॉयन दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है।
  • बिटकॉयन को विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी ऐक्सचेंज से खरीदा जा सकता है।
  • देखा जाए तो मूल्य के भंडार के रूप में बिटकॉइन का इतिहास अशांत रहा है। यह अपने अपेक्षाकृत कम जीवनकाल में कई उतार-चढ़ाव वाले चक्रों से गुजरा है। बिटकॉयन एक लेजर की तरह भी काम करता है, जो एक तरह की माइनिंग प्रक्रिया है। इस तरह से नए बिटकॉयन का भी जन्म होता है।

क्या भारत में क्रिप्टोकरेंसी लीगल है?

भुगतान के तौर पर देखा जाए तो भारत में क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा विनियमित नहीं किया जाता है। वर्ष 2021 में क्रिप्टोकरेंसी बिल सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किया गया था ताकि भारत में क्रिप्टोकरेंसी के फलते-फूलते बाजार को विनियमित किया जा सके। वर्ष 2022 फरवरी में सरकार ने क्रिप्टो के मुनाफे पर 30 प्रतिशत का भारी टैक्स लगाया और सभी क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन पर 1 प्रतिशत टीडीएस भी लगाया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को क्रिप्टोकरेंसी के बारे में चिंताओं से अवगत कराते हुए कहा था कि उन्हें प्रतिबंधित किया जाना चाहिए क्योंकि उनमें देश की मौद्रिक और राजकोषीय स्थिरता को अस्थिर करने की क्षमता है। भारत में वज़ीरएक्स, कॉइनडीसीएक्स, ज़ेबपे जैसे क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म हैं। जिनके वॉल्यूम में भी भारी भरकम उछाल देखने को मिल रहा है। हांलाकि इसी वर्ष 7 मार्च को बिटकॉइन, फिएट करेंसीज़ व अन्य क्रिप्टोकरेंसीज़ को पीएमएलए (PMLA) ऐक्ट के दायरे में लाया गया है। क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और बिचौलिये जो वीडीए में व्यापार करते हैं, उनके ग्राहकों और उपयोगकर्ताओं के केवाईसी करना अब अनिवार्य होगा और सारे रिकॉर्डस भी रखने होंगे। ऐसा करने का उद्देश सिर्फ यह है कि अगर जांच की जरुरत पड़े तो सही ढंग से जांच हो सके। इसी वर्ष फरवरी में वित्त मंत्री ने कहा था कि हम G-20 देशों से इस बारे में बातचीत कर रहे हैं ताकि क्रिप्टो संपत्ति को विनियमित करने के लिए एक स्टैनडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल भी तैयार किया जा सके।

आखिर क्या कहते हैं ब्लॉकचेन विशेषज्ञ।

लखनऊ के जाने माने ब्लॉकचेन विशेषज्ञ और शोधकर्ता श्री शुशांत वर्मा जिन्होंने कई ब्लॉकचेन उत्पादों और परियोजनाओं में अपनी विशेषज्ञता प्रदान की है। उनका मानना है कि भारत के अंदर जो विनियमन हैं वे काफी सख्त हैं। उचित कानूनों और कम कर दरों के माध्यम से निवेशकों, व्यापारियों को प्रेरित कर के उचित लेनदेन और स्पष्टता प्राप्त करने का तरीका हो सकता है। श्री शुशांत कहते हैं कि सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी बिल 2021 को लाकर एक सकरात्मक रुख अपनाया है। सख्त उपायों के साथ शुरू करते हुए वर्तमान विनियमन में क्रिप्टो लेनदेन पर भारी करारोपण किया जरुर गया, लेकिन फिर भी इसका उद्योग जगत द्वारा सकारात्मक ढंग से ही स्वागत किया।

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