Bihar:16 वर्षों बाद कारागार मुक्त हुआ बाहुबली, 26 और कि रिहाई के भी रास्ते साफ। वर्तमान समाचार

साल 1994 के दशक में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के   अधिकारी और गोपालगंज जिले के जिलाअधिकारी की मॉब लिंचिंग के दोषी बहुबली और पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह को गुरुवार सुबह सहरसा जेल से 6:15 पर रिहा कर दिया गया। गैंगस्टर से नेता बने आनंद मोहन सिंह को रिहा करने की सारी कागजी प्रक्रिया बीते बुधवार को ही पूरी हो चुकी थी। दिवंगत IAS की पत्नी इस बात से काफी दुखी हैं कि उनके पति के हत्यारे को रिहा कर दिया गया है। हालांकि पटना हाईकोर्ट में इस रिहाई के खिलाफ एक PIL  भी दाखिल की गई है। माना जा रहा है कि इस रिहाई के जरिए सत्तारुढ़ पार्टी राजपूत वोटों को साधना चाहती है। आनंद मोहन सिंह की रिहाई के बहाने सत्ता रुढ़ पार्टी ने 27 और कुख्यात बदमाशों की रिहाई का नोटिफिकेशन जारि कर दीया है।

कितना दबदबा है आनंद मोहन सिहं का बिहार की राजनीति में।

आनंद मोहन सिंह को बिहार के अंदर क्षत्रिय समाज की राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए जाना जाता है। आनंद मोहन सिंह ने बिहार में बिहार पीपुल्स पार्टी की स्थापना की ऐसा माना जाता है कि वे राजपूत समाज मे अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं। अब यह देखने वाला है कि इस बार के लोकसभा चुनावों मे यह कितना प्रभाव दिखा पाते हैं। क्योंकि 1994 और 2024 के बिहार मे जमीन और आसमान का अंतर है। तब के लोग अपनी जाति और विरादरी देख कर के ही वोट दिया करते थे, लेकिन आज की बात दूसरी है, भले ही पूरी तरह से बदलाव ना आया हो लेकिन काफी कुछ बदल चुका है। ऐसे में जातिगत आधार पर वोट लेना कितना प्रभावी होगा यह आने वाले लोकसभा चुनावों मे पता चल जाएगा।

कौन हैं वो 26 लोग जिन्हें छोड़ा जाना है।

आनंद मोहन सिंह को छोड़ने के अलावा 27 अन्य लोगों को छोड़ने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसमें से एक की मौत हो चुकी है, 26 अन्य को छोड़ने के लिए आगे की प्रक्रिया चालू है। छोड़े जाने वाले लोगों मे 8 यादव, 5 मुस्लिम, 4 राजपूत, 3 भूमिहार, 2 कोयरी, एक कुर्मी, एक गंगोत और एक नोनिया जाति से है।

क्या आनंद मोहन की रिहाई के लिए बदले गए नियम?

गैंगस्टर और पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह की रिहाई के लिए सरकार ने एक नियम मे बदलाव किया है। जिसमे सरकारी अधिकारी या अन्य कर्मी की हत्या करने वाले को पूरी सजा काटनी नहीं पड़ेगी, पहले ये था कि सरकारी अधिकारी या सेवक  बाकी सजायाफ्ता की तरह सरकारी सेवक की हत्या में शामिल अपराधियों के लिए भी इस छूट का प्रावधान ला दिया है। लेकिन जिन 26 लोगों को रिहा किया जा रहा है, उनपर किसी भी सरकारी अधिकारी या सेवक की हत्या का कोई आरोप नहीं इसीलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि आनंद मोहन सिंह के लिए जिन नियमों मे बदलाव किया गया था, उसी के आधार पर इन सभी 26 अपराधियों को छोड़ा जा रहा है यह कहना सही नहीं।

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