भगोड़े अमृतपाल सिंह को पंजाब पुलिस ने 37 दिनों बाद किया अरेस्ट, पुलिस के सामने किया था आत्मसमर्पण। वर्तमान समाचार

पंजाब: 18 मार्च से फरार चल रहे खालिस्तानी कट्टरपंथी उपदेशक अमृतपाल सिंह ने आज मोगा में पंजाब पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर असम के डिब्रूगढ़ में केंद्रीय जेल भेज दिया है। अमृत पाल सिंह को पंजाब के मोगा से गिरफ्तार करने के बाद उसकी गिरफ्तार की पुष्टि करते हुए पंजाब पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने, फर्जी खबरें नहीं फैलाने और अफवाहों पर ध्यान न देने को कहा है। इतना ही नहीं पुलिस ने लोगों से शांती व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी तरह की अफवाह को ना ही फैलाया जाए और न ही ऐसी किसी भी तरह की गलत जानकारी लोगों को गुमराह करने के लिए सोशल मीडिया पर डाली जाए। पंजाब पुलिस के IG सुखचैन सिंह गिल ने बताया कि 29 वर्षीय अमृतपाल सिंह ने रोड गांव के एक गुरुद्वारे में आत्मसमर्पण किया था। गिरफ्तार किए जाने के बाद अमृतपाल सिंह को असम के डिबरुगढ़ जेल ले जाया गया जहां उसके आठ सहयोगियों को पहले से ही राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम ऐक्ट के तहत रखा गया है, जो बिना किसी आरोप के एक साल तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। बता दें कि अमृतपाल सिंह को सरकार खालिस्तानी-पाकिस्तानी एजेंट बताती है, पिछले कुछ सालों से पंजाब में सक्रिय है और अक्सर सशस्त्र समर्थकों के साथ चलता है। वह खालिस्तानी अलगाववादी और आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले का अनुयायी होने का दावा करता है और अपने समर्थकों के बीच “भिंडरावाले 2.0” के नाम से जाना जाता है।

अजनाला में समर्थकों ने थाने पर धावा बोल छुड़ाया था अमृतपाल को।

फरवरी में अमृतपाल सिंह के समर्थक,  जिनमें से कुछ के पास  तलवारें और बंदूकें भी थीं वे बैरिकेड्स को तोड़कर अमृतसर शहर के बाहरी इलाके में अजनाला पुलिस स्टेशन में घुस गए, और अमृतपाल की रिहाई के लिए पुलिस से भिड़ गए थे। सूत्रों का कहना है कि अमृतपाल सिंह के खिलाफ जो कार्रवाई हुई है यह गृह मंत्री अमित शाह के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ 2 मार्च को हुई मीटिंग का नतीजा है।

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