बड़ा मंगल 2023: हनुमान जी के किस स्वरुप की होती है पूजा, क्या है महत्व और मान्यताएं जानिए। वर्तमान समाचार

वैसे तो बजरंग बली चिरंजीवी हैं, अपने भक्तों के लिए सदैव हर स्वरुप में सदैव मौजूद हैं। लेकिन आज प्रभु श्री राम के इस भक्त ही दिन है। कहते हैं सारे संसार मे प्रभु श्री राम के भक्त तो बहुत हुए होंगे लेकिन हनुमान जी जैसा शायद ही कोई होगा। इस वर्ष आज से ज्येष्ठ माह की शुरुआत हुई है, आज के दिन हनुमान जी के वृद्ध स्वरुप की पूजा की जाती है। इस दिन को बढ़ा मंगल या बुढ़वा मंगल भी कहा जाता है। आज के दिन की मान्यता है कि आज ही के दिन प्रभु श्री राम से हनुमान जी पहली बार मिले थे और आज ही के दिन उन्होंने भीम का घमंड भी तोड़ा था। इस वर्ष ज्येष्ठ का बड़ा मंगल 9 मई को मनाया जा रहा है।

बड़े मंगल का महत्व।

वैसे तो वर्ष का हर मंगलवार बजरंगबली का ही दिन होता है। लेकिन अगर बात करें ज्येष्ठ के बड़े मंगल की तो इस दिन की सबसे खास बात यह है कि ये महाभारत और रामायण से सीधे जुड़ा हुआ है। अगर आप इस दिन हनुमान जी को नारंगी या लाल रंग का चोला चढ़ावे में चढ़ाते हैं तो इस दिन आपके सारे दुख और संकट बजरंग बली हर लेंगे और आपको सभी दुखों से मुक्ती मिल जाएगी।

पूजा की विधि।

इस दिन का महत्व आप ऐसे ही समझीये कि पूजा पाठ की विधि इस दिन की सबसे खास है। जाने माने पंडित जितेंद्र शास्त्री के अनुसार बड़े मंगल के दिन दिन मे जल्दी उठकर सूर्य निकलने से पहले स्नान कर साफ कपड़े पहन लें। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा को गंगा जल से साफ कर ले और पूजा शुरु करें। पूजा स्थल पर लाल फूल, अक्षत, धूप, दीप, चंदन या फिर नारंगी रंग की लंगोट को चढ़ाएं। ध्यान रहे कि भोग लगाने के लिए सिर्फ मोतीचूर के लड्डू या फिर बूंदी का ही भोग लगाएं।

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