8 साल में 7 यू-टर्न, क्या नीतीश कुमार की विपक्षी एकता बिगाड़ रहे जीतन राम मांझी? वर्तमान समाचार

बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार को बड़ा झटका दिया है। मांझी के बेटे संतोष सुमन ने मंगलवार को नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। उनके बीजेपी के साथ जाने की अटकले अब और तेज हो गई हैं। बता दें जीतन राम मांझी ने दो महीने पहले ही बीजेपी नेता और गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।

2014 में नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी को जेडीयू से मुख्यमंत्री बनाया था, लेकिन कुछ महीने बाद ही मांझी ने नीतीश के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था। 2015 में मांझी ने हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) नाम से खुद की पार्टी बनाई।

बिहार की सियासत में पल्टी मारने में मांझी नीतीश कुमार से भी आगे निकल चुके हैं। 8 साल में मांझी ने 7 बार यूटर्न मारा है। कभी कांग्रेस के साथ अपनी राजनीतिक पृष्ट भूमि की शुरुआत करने वाले जीतन राम मांझी आज इतना बदल कैसे गए यह विपक्ष के नेताओं के लिए सोचने का विषय बना हुआ है।

नीतीश के पाले से बाहर क्यों जा रहे मांझी?

बिहार की सियासत में भी इन दिनों गर्मी काफी बढ़ती जा रही है सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि खुद को मुख्यमंत्री और बेटे को मंत्री बनाने वाले नीतीश कुमार से मांझी ने क्यों बगावत की? तो बता दें कुछ एक बाते हैं जिन्हें जान लेना जरुरी है नीतीश कुमार द्वारा शुरु की गई विपक्षी एकता की राह इतनी आसान भी नहीं थी।

  • जीतन राम मांझी की पार्टी हम (से) जेडीयू से अलग होकर बनी थी. नीतीश कुमार विपक्षी एकता में जुटे हैं और छोटी-छोटी पार्टियों को एकसाथ मर्ज करने की कवायद कर रहे हैं। इसी कड़ी में नीतीश कुमार मांझी से अपनी पार्टी का जेडीयू में विलय करने का दबाव बना रहे थे। विलय के पीछे जेडीयू सीट बंटवारे का तर्क दे रही थी। जेडीयू का कहना था कि हर छोटी पार्टियों को लोकसभा में सीट देना संभव नहीं है। संतोष सुमन ने इस्तीफा देने के बाद विलय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में सर्वाइव करना मुश्किल हो रहा था। संतोष के इस्तीफे के बाद जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने भी विलय करने की बात कही।
  • जीतन राम मांझी की पार्टी हम (से) 2020 के विधानसभा चुनाव में गया-जमुई की चार सीटों पर जीत मिली थी. खुद मांझी इमामगंज से, ज्योति देवी बाराचट्टी से, अनिल कुमार टिकारी से और प्रफुल मांझी सिकंदरा से जीत दर्ज की थी। यह चारों सीट राजद का मजबूत गढ़ रही हैं। 2024 में राजद इनमें से 2 सीट बाराचट्टी और टिकारी पर दावा ठोक सकता है। मांझी ये बात भी बखूबी से जानते हैं, इसलिए इन सीटों को लेकर आश्वासन चाह रहे थे।  मंगलवार (13 जून) को जब विजय चौधरी से बात नहीं बनी तो मांझी ने बेटे को बुलाकर इस्तीफा दिलवा दिया। 
  • जीतन राम मांझी गठबंधन में सहयोगी के नाते सत्ता की भागीदारी चाहते थे. मांझी 2021 से ही खुद के लिए 2 कैबिनेट बर्थ चाहते थे, लेकिन नीतीश कुमार 4 विधायक पर एक मंत्री के फॉर्मूले को आधार बनाकर उनके बेटे को मंत्री बनाया था। बीजेपी गठबंधन में संतोष सुमन को एससी-एसटी वेलफेयर के अलावा लघु जल संसाधन विभाग भी मिला था, लेकिन आरजेडी गठबंधन में यह उनसे ले लिया गया। मांझी ने उस वक्त भी नीतीश कुमार से विभाग बढ़ाने की मांग की थी। संतोष सुमन के इस्तीफे के बाद राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कह कि पद की लालसा में मांझी उतावले हो गए हैं।
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